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    अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण)
    अधिनियम, १९८९

    अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को अत्याचार से सुरक्षा प्रदान करने के लिये केन्द्र सरकार द्वारा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, १९८९, नियम-१९९५ एवं संशोधित नियम २०१४ पूरे बिहार में लागू किया गया है। यह एक केन्द्र प्रायोजित योजना है, जिसका व्यय ५०:५० के अनुपात में केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है।

    • माननीय मुख्यमंत्री महोदय की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय सर्तकता एवं अनुश्रवण समिति की नियमित रुप से बैठक आहुत की जा रही है। वर्ष-२०१४-१५ में दो बैठक क्रमश: दिनांक-०७.०२.२०१४ एवं २१.११.१४ को सम्पन्न की गयी है।
    • जिला स्तरीय सर्तकता एवं अनुश्रवण समिति की बैठक का कैलेण्डर, राज्य स्तर से निर्धारित कर दिया गया है। राज्य के सभी जिलों में वर्ष २०१४ में १०७ बैठक की गई है। अधिनियम-१९८९ के अंतर्गत दर्ज मामलों में सजा देने के दर में वृद्धि के लिए राज्य सरकार द्वारा निम्नांकित कदम उठाये गये है:-
    • (१). प्रधान सचिव, गृह विभाग द्वारा सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को इस अधिनियम के तहत् दर्ज काण्डों के शीघ्र निष्पादन के लिए निर्देश दिए गये है साथ ही पुलिस महानिदेशक द्वारा भी सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को इस अधिनियम के तहत् दर्ज काण्डों के शीघ्र निष्पादन के लिए निर्देश दिए गये हैं।

      (२). राज्य के सभी ४० पुलिस जिलों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए विशेष थानों की स्थापना की गयी है।

      (३). दर्ज मामलों के निष्पादन के लिए राज्य के सभी जिलों में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश का न्यायालय, विशेष न्यायालय के रुप में कार्यरत है। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पटना, गया, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, एवं भागलपुर में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम १९८९ के अन्तर्गत लंबित वादों की संख्या के त्वरित निष्पादनार्थ अनन्य विशेष न्यायालय (Exclusive special Court) की स्थापना की स्वीकृति दी गई है।

      (४). अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम- १९८९ के अन्तर्गत नियुक्त विशेष लोक अभियोजकों के कार्यों की समय-समय पर संबंधित जिला पदाधिकारी एवं महानिदेशक, अभियोजन द्वारा समीक्षा की जाती है।

    • विधि विभाग द्वारा इस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में सरकार का पक्ष मजबूती से रखने के लिए माननीय उच्च न्यायालय, पटना के स्तर पर भी विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति की गई है।
    • अत्याचार के मामलों में राहत अनुदान की राशि संशोधित नियम २०११, जो दिनांक -२३.०६.२०१४ से लागू है, के आलोक में रु० ४५००/- प्रतिमाह के दर से अत्याचार के पीड़ित/ पीड़ितों के आश्रितों को पेंशन योजना का लाभ दिया जा रहा है।
    • राज्य में इस अधिनियम के तहत प्रभावित पीड़ितों को सरकारी रोजगार दिया गया है। इसके अलावा नियम-११ के तहत मामलों के सुनवाई के दौरान पीड़ित/ पीड़िता आश्रित को यात्रा भत्ता/ दैनिक भत्ता का भुगतान किया जा रहा है।
    • आम जनता में जागरुकता फैलाने के उदेश्य से समय-समय पर दैनिक समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित किया जाता है तथा विशिष्ट स्थानों पर होर्डिंग लगाये गये हैं। साथ ही साथ फिल्म एवं लिफलेट के माध्यम से भी जागरुकता फैलाने का कार्य किया जाता है।
    • पुलिस पदाधिकारियों को संवेदनशील बनाने हेतु प्रशिक्षण / कार्यशाला का आयोजन किया जाता है।
    • अत्याचार पीड़ितों की सहायता के लिए टॉल फ्री नं०- "सहायता" १८००३४५६३४५ कार्यरत है।

    इस योजना से संबंधित सामाजिक अधिकारिता एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार के नियम एवं दिशा- निर्देश देखने हेतु Acts & Rules Page पर जायें ।