अनु0 जनजाति के लिये विशेष योजना

(१) अनु0 जनजाति के लिये विशेष केन्द्रीय सहायता:
इस योजना के तहत केन्द्र सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष राशि उपलब्ध करायी जाती है। इसमें बी0पी0एल0 के नीचे के अनु0 जनजाति के व्यक्तियों को आर्थिक विकास हेतु विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जाता है। वित्तीय २०१४-१५ में इस योजना के तहत् भारत सरकार द्वारा (१) पाँच छात्रावासों का ३०० क्षमता में उत्क्रमण, (२) कौशल विकास के लिये एक व्यवसायिक प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना, (३) कौशल विकास की योजनाओं एवं (४) आदिम जनजाति क्षेत्रों के लिये तीन माइक्रो-प्रोजेक्टस योजना की स्वीकृति दी गई है।

(२) संविधान की धारा २७५ (१):
इस योजना के तहत जनजाति क्षेत्र के आधारभूत संरचना विकास हेतु केंद्र सरकार द्वारा राशि उपलब्ध करायी जाती है। वित्तीय वर्ष 2015-16 में इस योजना के तहत् भारत सरकार द्वारा (१) पाँच ३०० आसन वाले आवासीय विद्यालय, (२) ४८० आसन वाले दो एकलब्य मोडेल आवासीय विद्यालय एवं (३) पाँच सामुदायिक सिंचाई योजना की स्वीकृति दी गई है।

(३) वनबन्धु कल्याण योजना :
केन्द्रीय योजनान्तर्गत, योजना के तहत अनुसूचित जनजाति के विकास हेतु केंद्र सरकार द्वारा प्रथम बार वित्तीय वर्ष २०१५-१६ से राशि उपलब्ध करायी गयी है। इस योजना के तहत निम्नलिखित योजनाओं के लिए राशि विमुक्त की गयी है:-
(१) आवासीय पिछवाड़े में मछलीपालन (२) अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, २००६ के तहत लाभान्वित व्यक्तियों के लिए योजना) (३) स्थानीय हाट बाजार का विकास (४) सम्पूर्ण विद्युतिकरण (५) जनजाति दवा एवं आयुर्वेद (६) जनजातिय क्षेत्र में सामुदायिक शौचालय एवं स्नानागार का निर्माण (७) सिंचाई सुविधा का विकास।

(४) थारु अनु0 जनजाति विकास :
बिहार में थारु जाति को अनु0 जनजाति में वर्ष २००३ में सम्मिलित किया है। इस थारु जनजाति के विकास के लिए विशेष रुप से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। वर्ष २००८ -०९ से ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के लिए कुल रु० १२५ करोड़ की योजना की स्वीकृति दी गयी है। इसके तहत् मुख्य रुप से प० चम्पारण जिला के अनु० जनजाति के लिए ५ बालक एवं ५ बालिका आवासीय उच्च विद्यालय स्थापना की स्वीकृति दी गई है।

(५) अनु0 जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, २००६, नियम २००८ एवं संशोधित नियम २०१२ :
अनु० जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, २००६, नियम २००८ एवं संशोधित नियम २०१२ को राज्य के अनु० जनजाति बहुल जिलों में कार्यान्वित किया जा रहा है।
इस अधिनियम के प्रावधानों के सफल कार्यान्वयन एवं कार्य योजना तैयार करने, अर्हता प्राप्त व्यक्तियों को पट्टा दिये जाने एवं अन्य सामुदायिक सुविधाओं को पहुँचाने तथा त्वरित कारवाई करने हेतु संबंधित जिला पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं गैर-सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को कार्यशाला सह प्रशिक्षण के माध्यम से राज्य स्तर पर प्रशिक्षित किया गया है।

(६) आदिम जनजाति (PTG) का सर्वेक्षण एवं विकास:
राज्य के आदिम जनजाति (PTG) का सर्वेक्षण मानव शास्त्र विभाग, विनोवा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग द्वारा कराया गया है। साथ ही संरक्षण-सह-विकास (CCD) प्लान तैयार किया गया है। राज्य के आदिम जनजाति (PTG) के विकास हेतु वित्तीय वर्ष २०१४ -१५ में योजनाओं की स्वीकृति दी गई है।

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